Ujala – Handmade Art soap

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SKU: UJALA Category:

Description

A simple activated charcoal soap. Dark as night on one side, and with the light of dawn hitting a cloudy sky on the other. Inspired by Yash Malviya’s poem “Ujaala’ (lyrics further below). Like the song, the soap is simple and excellent with an understated appeal that grows on you.

दबे पैरों से उजाला आ रहा है
फिर कथाओं को खँगाला जा रहा है

धुंध से चेहरा निकलता दिख रहा है
कौन क्षितिजों पर सवेरा लिख रहा है
चुप्पियाँ हैं जुबाँ बनकर फूटने को
दिलों में गुस्सा उबाला जा रहा है

दूर तक औ’ देर तक सोचें भला क्या
देखना है बस फिजाँ में है घुला क्या
हवा में उछले सिरों के बीच ही अब
सच शगूफे सा उछाला जा रहा है

नाचते हैं भय सियारों से रँगे हैं
जिधर देखो उस तरफ कुहरे टँगे हैं
जो नशे में धुत्त हैं उनकी कहें क्या
होश वालों को सँभाला जा रहा है

स्थगित है गति समय का रथ रुका है
कह रहा मन बहुत नाटक हो चुका है
प्रश्न का उत्तर कठिन है इसलिए भी
प्रश्न सौ-सौ बार टाला जा रहा है

सेंध गहरी नींद में भी लग गई है
खीझती सी रात काली जग गई है
दृष्टि में है रोशनी की एक चलनी
और गाढ़ा धुआँ चाला जा रहा है

Has a very outdoorsy, “masculine” fragrance that reminds of leather, amber, musk. I have no idea why such a fragrance is described as masculine, because I’d totally use it. I think people are just used to thinking of florals as feminine, fruity as childish and everything as masculine or something.

Some photos from the making of this soap.

Ingredients: saponified coconut oil, saponified palmolein, saponified castor oil, saponified almond oil, activated charcoal, mica colors (cosmetic grade), hydrolyzed silk, fragrance oil.

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